{2019} Ganpati Stotra in Sanskrit, English, Hindi, and Marathi with Meaning



Sankat Nashak Ganesh Stotra | Ganapati Stotra with meaning in Hindi.

Ganpati Stotra



नारद उवाच:
प्रणम्य शिरसा देवं
गौरीपुत्रं विनायकम्।
भक्तावासं स्मरेन्नित्यं
आयुःकामार्थ सिद्धये॥१॥
पार्वतीनन्दन देवदेव श्रीगणेश जी को सिर झुकाकर प्रणाम करके अपनी आयु, कामना और अर्थ की सिद्धि के लिये उन भक्त निवास का नित्यप्रति स्मरण करें – पहला श्लोक.

प्रथमं वक्रतुंण्डं च

एकदन्तं द्वितीयकम।

तृतीयं कृष्णपिंगाक्षं

गजवक्त्रं चतुर्थकम॥॥२॥


लम्बोदरं पंचमं च
षष्ठं विकटमेव च।
सप्तमं विघ्नराजं च
(सप्तमं विघ्नराजेन्द्रं)
धूम्रवर्णं तथाष्टमम्॥३॥


नवमं भालचन्द्रं च
दशमं तु गजाननम्।
एकादशं गणपतिं
द्वादशं तु गजाननम्॥४॥

द्वादशैतानि नामामि
त्रिसन्ध्यं य: पठेन्नर:।
न च विघ्नभयं तस्य
सर्वसिद्धिकरं प्रभो॥५॥

पहला वक्रतुण्ड, दूसरा एकदन्त, तीसरा कृष्णपिंगाक्ष, चौथा गजवक्त्र, पाँचवां लम्बोदर, छठा विकट, सातवाँ विघ्नराजेन्द्र, आठवाँ धूम्रवर्णं, नवाँ भालचन्द्र, दसवाँ विनायक, ग्यारहवाँ गणपति और बारहवाँ गजानन – इन बारह नामों का जो व्यक्ति तीनों संध्याओं (प्रात:, मध्याह्न और सायंकाल) में पाठ करता है, हे प्रभो ! उसे किसी भी तरह के विघ्न का भय नहीं रहता है. इस प्रकार का स्मरण सभी सिद्धियाँ देने वाला होता है.

विद्यार्थी लभते विद्यां,
धनार्थी लभते धनम्।
पुत्रार्थी लभते पुत्रान्-
मोक्षार्थी लभते गतिम्॥६॥

इससे विद्याभिलाषी विद्या, धन के अभिलाषी धन, पुत्र की इच्छा वाले पुत्र तथा मुमुक्षु मोक्षगति प्राप्त कर लेता है.
जपेद गणपतिस्तोत्रं
षडभिर्मासै: फलं लभेत्।
संवत्सरेण सिद्धिं च
लभते नात्र संशय:॥७॥

जो व्यक्ति इस गणपति स्तोत्र का जप करता है, उसे छ: महीने में मनोवांछित फल प्राप्त होता है और एक वर्ष में पूर्ण सिद्धि प्राप्त हो जाती है, इसमें किसी प्रकार का कोई सन्देह नहीं है.

अष्टभ्यो ब्राह्मणेभ्यश्च
लिखित्वा य: समर्पयेत।
तस्य विद्या भवेत्सर्वा
गणेशस्य प्रसादत:॥८॥

जो पुरुष इसे लिखकर आठ ब्राह्मणों को समर्पण करता है, गणेश जी की कृपा से उसे सब प्राकर की विद्या प्राप्त हो जाती है.
॥इति श्रीनारदपुराणे श्रीसंकटनाशन

गणेशस्तोत्रं सम्पूर्णम॥॥




Ganpati Stotra in Sanskrit



। संकटनाशनगणेशद्वादशनामस्तोत्रम्।।
नारद उवाच
प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्रं विनायकम्।
भक्तावासं स्मरेन्नित्यमायुःकामार्थसिद्धये।।
प्रथमं वक्रतुण्डं च एकदन्तं दि्वतीयकम्।
तृतीयं कृष्णपिंगाक्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम्।।
लम्बोदरं पंचमं च षष्ठं विकटमेव च।
सप्तमं विघ्नराजं च धूम्रवर्णं तथाष्टमम्।।
नवमं भालचन्द्रं च दशमं तु विनायकम्।
एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजाननम्।।
द्वादशैतानि नामानि त्रिसन्ध्यं यः पठेन्नरः।
न च विघ्नभयं तस्य सर्वसिद्धिकरं प्रभो।।
विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम्।
पुत्रार्थी लभते पुत्रान् मोक्षार्थी लभते गतिम्।।
जपेद् गणपतिस्तोत्रं षड्भिर्मासैः फलं लभेत्।
संवत्सरेण च संसिद्धिं लभते नात्र संशयः।।
अष्टभ्यो ब्राह्मणेभ्यश्च लिखित्वा यः समर्पयेत्।
तस्य विद्या भवेत् सर्वा गणेशस्य प्रसादतः।।
।। इतिश्रीनारदपुराणे संकटनाशननाम गणेशद्वादशनामस्तोत्रं सम्पूर्णम्।।



Ganpati Stotra In Marathi


साष्टांग नमन हे माझे गौरीपुत्र विनायका |
भक्तीने स्मरता नित्य आयुकामार्थ साधती ||१||
प्रथम नाव वक्रतुंड दूसरे एकदन्तं ते |
तीसरे कृष्णपिंगाक्ष चौथे गजवक्त्र ते ||२||
पाचवे श्रीलम्बोदर सहावे विकट नाव ते |
सातवे विघ्नराजेन्द्रं आठवे धुम्रवर्ण ते ||३||
नववे श्री भालचंद्र दहावे श्री विनायक |
अकरावे गणपति बारावे श्री गजानन ||४||
देव नावे अशी बारा तीन संध्या म्हणे नर |
विघ्न भीति नसे त्याला प्रभो तू सर्वसिद्धिद ||५|
विद्यार्थ्याला मिळेल विद्या धनार्थ्याला मिळेल धन |
पुत्रार्थ्याला मिळेल पुत्र मोक्षार्थ्याला मिळेल गति ||६||
जपता गणपति स्त्रोत्र सहा मासात हे फल |
एक वर्ष पूर्ण होता मिळेल सिद्धि न संशय ||७||
नारदानी रचिलेले जाले सम्पूर्ण स्त्रोत्र हे |
श्रीधरन मराठीत पठण्या अनुवादीले ||८||



Ganapati Stotra in English-Marathi



Sashtang Naman He Majhe Gouriputra Vinayaka|

Bhakatine Smarata Nity Aayukamart Sadhati ||1||

Pratham Nav Vakrtund Dusare Aekdanta te|

Tisare Krushnpingaksh Chouthe Gajavakrate||2||

Pachave Shree Lambodar Sahave Vikatmevate|

Satave Vighnrajendra AAthave Dhumravarn te||3||

Navave Shree Bhalachandra Dahave Shree Vinayak|
Aakarave Ganapati Barave Shree Gajanan||4||
Dev Nave Ashi Bara Tin Sandhya Mhane Nar |
Vighnbhiti nase tyala Prbho tu sarv siddhi de||5||
Vidyarthyala Milel Vidya Dhanarthyala Milel Dhan|
Putrarthyala Milel Putr Moksharthyala Milel Gati||6||
Japata Ganapati Strotr Saha Masat Mile Fal|
Aekwarsh Purn Hotha Milel Siddhi n Sanshay||7||
Naradani Rachilele Zale Sampurn Strotr He|
Shreedharane Marathit Patanya Aanuvadile||8||




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